जय हो! जय हो! गाइये!

Rag Darbari करटक घिसटता हुआ जंगल के राजा पिंगलक के समक्ष आकर बैठ गया, ढंग से नमस्ते भी नहीं की और पूंछ भी नहीं हिलाई। अपने मंत्री की पीली आंखों में मरी हुई दृष्टि देखकर पिंगलक हैरान हुआ। किसी तरह मूंछों पर ताव देकर रुखाई से बोला– ‘कैसे हैं मंत्रिवर !’करटक बोला–... [पूरी पोस्ट]
writer Mohanlal Gupta

satire

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[22 Dec 2009 06:22 AM]

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