'श्रम के घंटे और मनुष्य का अवकाश'
'श्रम के घंटे और मनुष्य का अवकाश' शीर्षक से यह निबंध करीब चार साल पहले 'कथन' पत्रिका में प्रकाशित हुआ था और इसके कुछ अंश भी इधर-उधर आये थे। पिछली पोस्टों में दिए गए धर्म विषयक आलेख को जिस उत्साह और रुचि से पढ़ा गया, उससे मुझे आशा है कि इस निबंधात्मक...
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कुमार अम्बुज
श्रम
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[09 Sep 2009 02:42 AM]



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