श्रमिक यंत्र नहीं, जीवित मनुष्य है
दूसरी किश्तनौकरी और दासता में कुछ फर्क हैसंस्थान में अधिक समय गुजारने का सीधा प्रभाव यह पड़ता है कि शेष समय में भी संस्थान और काम आपका पीछा करता है। यह लगभग वैसा ही है जैसे लंबी रेल-यात्रा के बाद, घर के बिस्तर पर सोते हुए भी हमारी नींद में हमें रेल-बर्थ...
[पूरी पोस्ट]
कुमार अम्बुज
10
0
0
0
0
[20 Oct 2009 02:29 AM]



Shuffle








