अश्क बनकर बह..

NirjharNeer सहरा में भटकता राही और प्यास की व्याकुलता भूख से बिलखते बच्चे की बेबस माँ का मर्म बेटे की अर्थी से झुकता बेसहारा बाप का कन्धा शूखती फसल के पत्तो को देखते किसान की बेकशीबाढ़ में बहती जिंदगी और मौत के आलिंगन का अहसासमेरे दिल में ऐसे ही कुछ अहसासों का ज्वार... [पूरी पोस्ट]
writer निर्झर'नीर
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[29 Aug 2009 04:49 AM]

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