निरीहों को क्या मालूम
मेले के दिनों में शहर से बाहर निकलते ही देखा कि एक चरवाहा बकरियों को हाँकता हुआ शहर की तरफ़ ला रहा है , पहला ख्याल दिल में यही आया कि ये या तो धर्म के नाम पर बलि चढेंगी या दुकानदारों और होटल वालों को बेची जायेंगी , आख़िर हश्र वही है अय्यड़ को हाँका है...
[पूरी पोस्ट]
शारदा अरोरा
14
0
0
0
0
[13 Aug 2009 12:47 PM]



Shuffle








