निरीहों को क्या मालूम

safar ke sajde mein मेले के दिनों में शहर से बाहर निकलते ही देखा कि एक चरवाहा बकरियों को हाँकता हुआ शहर की तरफ़ ला रहा है , पहला ख्याल दिल में यही आया कि ये या तो धर्म के नाम पर बलि चढेंगी या दुकानदारों और होटल वालों को बेची जायेंगी , आख़िर हश्र वही है अय्यड़ को हाँका है... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[13 Aug 2009 12:47 PM]

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