सब आंखे बयान करती हैं...

parkhinazar तू है पापी तू है भ्रष्ट कितना भी छिपाए तू सब आंखे बयान करती हैं।मुंह में राम बगल में छुरी कितना भी बने तू सब आंखे बयान करती हैं।मन में पाप बातों में संतवाणी कितना भी ठगे तू सब आंखे बयान करती हैं।झूट बोले रंग बदले कितना भी छले तू सब आंखे बयान करती... [पूरी पोस्ट]
writer manoj
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[17 Aug 2009 01:55 AM]

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