इक्कीसवी सदी

ज्ञानसिंधु मदारी डुगडुगी बजाता हुआ गोलचक्कर काटता है । लोग जमा हो रहे है । लो , मजमा लग गया है ।'' हाँ तो भाईसहाब , मेहरबान , कद्रदान कमर कस कर बैठिए और एक से एक नायाब खेल देखिये ।जमूरे !हाँ उस्तादजायेगा?हाँ जाऊंगा ।कहाँ जायेगा ?इक्कीसवी सदी में ।ये मुँह और मसूर की... [पूरी पोस्ट]
writer भगीरथ

भगीरथ के व्यंग्य

views
15
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[23 Jul 2009 06:38 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix