ख्वाब हैं मेरे कि जी उठते हैं ईसा की तरह

कुछ शब्द इसबार का सूर्य-ग्रहण जो कई मायने में अनूठा था, आया और गया। बारिश कई जगह बाधक बन गया इस अद्भुत खगोलीय घटना का अवलोकन करने में। अब संयोग देखिये कि मेरा कंप्यूटर भी ग्रहण का शिकार हो गया और अभी तक है। शायद एक -दो दिन और लगे उबरने में। अभी-अभी एक गज़ल को... [पूरी पोस्ट]
writer रविकांत पाण्डेय
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[23 Jul 2009 04:57 AM]

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