प्रेम तो हर पल नया है......
आज इस कविता को पोस्ट करते वक्त ईश्वर से प्रार्थनारत हूं कि आप तक इसका सही भाव ही संप्रेषित हो। बस भूमिका में और कुछ लिखने का मन नहीं है।सदा वही मैं गीत सुनाऊं, तुमने चाहा है मुझसेपर ये कहता सत्य सृष्टि का, प्रेम तो हर पल नया हैहर ठौर उसी का वास अगर, एक...
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रविकांत पाण्डेय
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[21 Aug 2009 13:07 PM]



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