दो छंद पढ़िये आज की हालात पर....
नमस्कार साथियों! आज की हालात पर कुछ कहना चाह रहा था। सोचा एक लंबा लेख लिखूं लेकिन अच्छा लगा कि बात कविता के सहारे आप तक पहुंचाई जाये। तो आइये जुड़ते हैं इस घनाक्षरी दंडक से-(१)खेत-खेत फैल गये, खर-पतवार अबकितना भी काटो पर, फ़िर-फ़िर आते हैंअपना ठिकाना नहीं,...
[पूरी पोस्ट]
रविकांत पाण्डेय
5
0
0
0
0
[26 Aug 2009 04:07 AM]



Shuffle








