रोजगार और बाजार से जुड़ी हिंदी, जगा रही अपार संभावनाएं
-डॉ. अशोक प्रियरंजनहिंदी के प्रति अब नजरिया बदल रहा है । अब तक अंग्रेजी इसलिए ज्यादा पढ़ी जाती थी क्योंकि उसे रोजगार दिलाने में सहायक माना जाता था । अब हिंदी भी रोजगार और बाजार से जुड़ रही है। ऐसे में हिंदी के विस्तार की अपार संभावनाएं पैदा हो रही हैं ।...
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dr. ashok priyaranjan
हिन्दी भाषा
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[13 Sep 2009 15:58 PM]



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