बाँके बिहारी

Harsha Prasad ऐ बाँके बिहारी, आओ, लोग आपस में लड़ कर मर रहे हैं. उनमे से बहुत से हैं जो तुम में आस्था रखते हैं, और जिन्हें कोई भी आस्था बचा नहीं पा रही. बहुत से जो बचा लिए जा रहे हैं, उनसे तुम्हारा कोई लेना देना नहीं, न बचने वालों का, न बचाने वालों का. ऐसा क्यों हैं... [पूरी पोस्ट]
writer हर्ष प्रसाद

जन्माष्ठमी

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[13 Aug 2009 15:36 PM]

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