प्रतिबिम्ब(साहित्य अमृत पत्रिका मई 2009 में प्रकाशित)
आज मेरे ब्लोग की प्रथम वर्षगांठ है । आप सभी ब्लोग पर पधार कर मुझे आशीश एंव प्रोत्साहन दें । ”मेरी कलाकृतियों को आपका विश्वाश मिलाबीत गया साल लोगों का इतना प्यार मिला ” ”सूरज बनकर देखो, चेहरा तुम्हारा बिम्ब हैढेरों तारे आस्मां में, आंखों में प्रतिबिम्ब है...
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Yamini Gaur
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[01 Sep 2009 08:14 AM]



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