गजल-- ऐसे भी कुछ लोग हैं जो ग़मज़दा मिलते रहे -- वीनस केसरी
आज की गजल मैं अपने गुरु जी पंकज सुबीर जी को समर्पित कर रहा हूँगुरु जी द्वारा दिए गए ज्ञान, मेरी खामियों को दूर करने के सतत प्रयास व दिशानिर्देशन से ही संभव हो सका है की आज मेरी लेखनी निरंतर सुधार की और अग्रसर हैप्रस्तुत गजल आपके सामने आ पायी इसके लिए कहन...
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venus kesari
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[11 Aug 2009 14:10 PM]



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