इतिहास याद दिलाये
इतिहास याद दिलाये मेवाड़ी जयमल पत्ता की !मेवाड़ी जयमल पत्ता की ! जागो ! जागो !!जली रानियाँ जौहर व्रत ले , अंगारों से खेली थी अंगारों से खेली |शान बेचकर कायर की भांति अश्रु धारा ले ली अब अश्रु धारा ले ली ||भूल गया क्यों भोले तलवार राणा सांगा की !तलवार राणा...
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.राजुल शेखावत
कविता
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[01 Aug 2009 09:57 AM]



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