साथी संभल-संभल कर चलना
साथी संभल-संभल कर चलना बीहड़ पंथ हमारा |है अँधियारा पर प्राची में झांक रहा सवेरा ||बलिवेदी का अंगारा तू जीवन ज्योति जला दे | जीवन ...लम्बी मंजिल बढ़ता जा होनी से कदम मिला ले , होनी से ...गौरव से जीने मरने की बढ़ने की यह परम्परा ||साथी संभल-संभल कर चलना...
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Ratan Singh Shekhawat
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[24 Aug 2009 23:02 PM]



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