दिल तो खिलौना है
दिल तो खिलौना है,आँखों को रोना है,इस जहाँ में ना था कोई, अपना,ना हम किसी के हैं,ना किसी का होना है...एक दोस्त बनाया था,हँसना उसने सिखाया था,भूल गए थे वो तो है इंसान,हमने तो उसे,भगवान के साथ बैठाया था...रोंद के भावों को चल दिया वो,बात आज ऐसी कह गया...
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मीत
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[29 Aug 2009 07:51 AM]



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