जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

प्रतीक माहेश्वरी जब जनम हुआ इस नटखट का | तब जहां पूरा खिलखिलाया || इसके चंचल बचपन में |पूरा गोकुल भरमाया || मीरा राधा खो गयी |ऐसी प्रीत लगाई || हर बुराई का नाश किया |दुनिया को सीख सिखाई || तुम चंचल, प्यारे, निडर बनो |बस यही गीता का सार || मुबारक हो आपको जन्माष्टमी का... [पूरी पोस्ट]
writer Pratik Maheshwari

मेरी कविताएँ....

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[14 Aug 2009 07:35 AM]

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