चंबल की घाटियों में दहकता प्रतिशोध

इंद्रजाल कॉमिक्स का स्वप्नलोक वह बचपन की एक उदास धुंधली शाम थी। जब क्षितिज से सुरमई धुआं उठने लगता और घरों में साठ वाट के बल्ब की पीली रोशनी चमकने लगती थी। शाम को परिवार के बड़े घर लौटते तो कुछ नया घटित होने का चस्का भी रहता था। बड़े भाई के हाथ में इंद्रजाल कॉमिक्स का नया अंक देख... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेश श्रीनेत

पात्र परिचय

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[06 Aug 2009 11:58 AM]

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