'गोम्बे हब्बा' को फिर से लोकप्रिय बनाने का प्रयास

Dakshin Bharat मैसूर। दशहरे की परंपराओं के साथ यहां का 'गोम्बे हब्बा' (गुड़ियों का उत्सव) विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। यह परंपरा मैसूरवासियों के लिए खासी महत्वपूर्ण रही है। यह उसी समय से चली आ रही है जिस समय वाडेयार राजघराने के शासक मैसूर की सत्ता पर आसीन थे। इस नजरिए से... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीकांत पाराशर
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[23 Sep 2009 03:29 AM]

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