"बरसात हो"

कुछ लम्हे "बरसात हो" "काश" आज फ़िर ऐसी झूम के बरसात हो ,उनसे फ़िर एक हसीन दिलकश मुलाकात हो ,इस कदर मिलें तड़प के दो दिल आज की,धरकनो पे न कोई अब इख्त्यार हो ….. एक एक बूंद से सजी सारी कायनात हो ,आगोश मे फ़िर मेरी शरीके -हयात हो ,खामोश लबों की दास्ताँ मौसम भी सुने... [पूरी पोस्ट]
writer seema gupta

swargvibha

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[13 Aug 2009 01:22 AM]

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