यहां विचारधारा नहीं व्यक्तिविशेष ही सबकुछ
भारतीय जनता पार्टी में न असहमतियों न ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए कहीं कोई जगह है। वहां दोनों ही चीजें एकदम हाशिए पर हैं। भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा खासा फासीवादी है। वहां न किसी को सुना जाता है न ही समझा। यह पार्टी बस कुछ वरिष्ठों के...
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अंशुमाली रस्तोगी
प्रसंग
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[24 Aug 2009 03:52 AM]



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