क्या इतिहास के बासी पाठों को पढ़ना हमारी मजबूरी है?
क्या जिन्ना-राग देश में व्याप्त सूखे और महंगाई के कहर से कहीं ज्यादा जरूर है? क्या यह कब्र में दफन जिन्ना के कंकाल को पुनः बाहर निकालने का प्रयास तो नहीं? क्या आत्महत्या करते किसानों के दर्द से कहीं ज्यादा जरूरी है जिन्ना-प्रेम? क्या राजनीति में मुद्दे...
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अंशुमाली रस्तोगी
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[09 Sep 2009 03:32 AM]



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