डरता हूँ 'अक्लमंदों' से (रुबाइयाँ)
काश , ऐसा न कुछ करे कोई, रात भर सिसकियाँ भरे कोई,बेवफाई न इस कदर कीजे,प्यार के नाम से डरे कोई। लोग कितने अजीब होते हैं,गर्ज़ हो तो करीब होते हैं,फेर लेते नज़र खुदा बन कर,क्योंकि दिल के ग़रीब होते हैं।खौफ़ कैसा खुदा के बन्दों से,खंजरों से लगे न फन्दों से,...
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Hemant Snehi
दोस्ती
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[13 Sep 2009 13:10 PM]



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