जैसे अमावस का चांद हो.........
समीर जी (उङनतश्तरी) को जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाऐं। आप हमेशा हमारी होसला अफजाई करते रहे और हमें टिपियाते रहें। मोतीचूर का बहुत बङा लड्डू हमारी और से आपके लिए। हम ढूंढते रहते है,नज़रें उठाके उसको,जाने कहां छुपके बैठा है,वो, बादल की ओट में।पत्थरा गई ये...
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PREETI BARTHWAL
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[28 Jul 2009 20:40 PM]



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