शायद ये ख्वाब वाली, नई उम्र हो जैसे..........

MERA SAGAR जिस रात में, मिली थी,मुझसे मेरी महोब्बत,उस रात ही कहीं पे,दिल खो दिया था मैंने।बन फूल, खिल रही थी,तितली-सी उङ रही थी,होठों की एक हंसी ने,मन छू लिया हो जैसे।बिन घुंघरूओं के बजती,पैरों में अब तो पायल,मैं नाचती थिरकती,दिल झूमता है ऐसे।लगने लगा है सबकुछ,अब... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL

poetry

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[30 Jul 2009 20:37 PM]

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