कहीं खोया हुआ अपना, वो सामान मिल जाए............

MERA SAGAR कहीं खामोश पन्नों पे,बीते लम्हों की कहानी,बदलते वक्त की हसरत,बदलती जिन्दगानी।मुसाफिर भी बने इसमें,हमसफर भी बनने आये,मुकद्दर में ही, न था जो,वो, दर से ही लौट आये।पत्थर के मकां भी थे,मिट्टी की मजारें भी,दरारें उसमें भी उतनी ही,दरारें इसमें थी जितनी।पिघलती... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL

poetry

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[06 Aug 2009 20:50 PM]

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