देखो चांदनी रात में..........

MERA SAGAR खोये-खोये से चांद पर,जब बारिश की बूंदे बैठती,और बादल की परत,घूंघट में हो, उसे घेरती,तब फिसल कर गाल पर,एक तब्बसुम खिलने लगे,देखो चांदनी रात में,अम्बर धरा मिलने लगे।कुछ मंद-मंद मुस्कान सी,आंखें चमक बिखेरती,हाथों की लकीरों पे हो जैसे,नाम अम्बर फेरती,यूं धरा... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL

poetry

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[30 Aug 2009 20:32 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix