........लेकिन पानियों पर चलने को राजी नहीं होते कदम ....

मेरे आस-पास जिन वजहों से ........ पानियों में कभी बहे ........ वो वजहें अब पानियों में बह गई हैं ........ अब ........ उन पानियों के दो किनारे बन ....... पानियों में ...... उन वजहों को टटोलते हैं ....... पर हर बार हाथ खाली ही रहते हैं ....... थक कर खड़े होते हैं... [पूरी पोस्ट]
writer MANVINDER BHIMBER

पानियों

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[28 Jul 2009 04:47 AM]

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