आज के दिन का ना खत्म होने वाला इंतजार....

MERE SAPNE MERE APNE जब मैं छोटा था शायद ७-८ साल का, तब से करीब २० साल की उम्र तक मुझे अच्छी तरह से याद है मैं इस त्यौहार पर किसी का इंतजार करता था। घर के दरवाजे पर झूलते हुए, पीछे से मम्मी की डांट, जब तक दरवाजा टूट नहीं जाएगा तब तक यूं ही राह तकता रहोगा। कभी सीढ़ियों पर बैठ... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj

rakhi

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[04 Aug 2009 16:23 PM]

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