आज के दिन का ना खत्म होने वाला इंतजार....--2
...........मेरी चचेरी बहन, पूरे खानदान के नौ भाइयों की इकलौती बहन। इस बार सभी नौ भाइयों की कलाई सूनी.....इस बार नहीं, शायद हर बार।कितने मजबूर होते हैं हम, कई बार कुछ भी नहीं कर पाते। सिर्फ कठपुतलियों की तरह इधर से उधर होते रहते हैं। हमारे अपने दुख के उस...
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Nitish Raj
rakhi
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[05 Aug 2009 06:25 AM]



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