जी हम भी कविता करते हैं

कुछ ग़ज़ल कुछ गीत ! मान्य महोदय हमें बुलायें सम्मेलन में हम भी कवि हैंहर महफ़िल में जकर कविता खुले कंठ गाया करते हैं हमने हर छुटकुला उठा कर अक्सर उसकी टाँगें तोड़ींऔर सभ्य भाषा की जितनी थीं सीमायें, सारी छोड़ीपहले तो द्विअर्थी शब्दों से हम काम चला लेते थेबातें साफ़ किन्तु अब... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश खंडेलवाल
views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[23 Jul 2009 22:27 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix