डा० अमर ज्योति--जन्म दिन शुभ हो
पीर के अश्रुओं से भरी लेखनी, शब्द को जन्म दे, खिलखिलाती रहेराह की धूल यमुना की रेती बनी, आपके भाल टीका लगाती रहेचार दिन छह दहाई शती त्रय दिवस,आज का ही निरंतर करें अनुसरणभोर आ नज़्म की वीथिका में किरण, से गज़ल का कलेवर सजाती रहेसादर शुभकामनाओं सहितराकेश...
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राकेश खंडेलवाल
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[31 Jul 2009 18:00 PM]



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