कारीगर

खामोश पहलू ... "बस आधे घंटे रुकेगी यहाँ.. जिसको खाना पीना है खा लो भाई..", कंडक्टर ने चिल्लाते हुए आवाज़ लगायी तो मेरी आँख खुल गयी.. घड़ी दिन के १ का वक़्त दिखा रही थी.. मथुरा से दिल्ली का सफ़र यूँ तो कोई खास लम्बा नहीं है पर हम हिन्दोस्तानियों की मैनुफैक्चरिंग में ही... [पूरी पोस्ट]
writer केतन कनौजिया 'शाइर'

कुछ यूँ ही...

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[17 Sep 2009 04:48 AM]

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