रब अता करे
आदरणीय गुरु प्राण शर्मा जी की सलाहियतों के बगैर ये ग़ज़ल पूरी होना संभव नहीं था उनके इस स्नेह और आशीर्वाद के लिए मैं जीवन भर अभारी रहूंगी हो एक ऐसा शख्स जो, मोहब्बत-ओ-वफ़ा करेउठाए हाथ जब भी वो, मेरे लिए दुआ करेअकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुईतो...
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श्रद्धा जैन
shrddha jain
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[06 Aug 2009 07:40 AM]



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