मुझ सा ही दीवाना लगता है आईना

भीगी गज़ल मुझ सा ही दीवाना लगता है आईना पल में रोता, पल में हंसता है आईनाशायद कोई उम्मीद जगे अब सीने मेंदरवाज़े को शब भर तकता है आईना दिलवर हैं आ बैठे पल भर को पास मेरेइक दुल्हन जैसा अब सजता है आईना गैरों के घर रोशन करने की है आदत चुपचाप इसी धुन में जलता है... [पूरी पोस्ट]
writer श्रद्धा जैन

shrddha jain

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[18 Aug 2009 11:39 AM]

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