कुछ का,,,,,,

मेरे पंख,,,,,,,,,,,,,,,,, सपनों की जंग मेंहम जीत गएपरहकीकत में ऐसे हारेकि-जीने की तमन्ना भीन रहीतमन्ना थीकुछ करने कीपर-उस कुछ का पीछाकरते करते आ गएहम वहां जहाँ न आगेरास्ता थान पीछे आखिर वो कुछक्या थाकि-हम आ गए ऐसे मोड़ परजहाँकोई रास्ता ही न थाफिर हौले से पड़े पड़ेइक ख़यालआया हम ही... [पूरी पोस्ट]
writer Samyak

बहुत कुछ

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[26 Jul 2009 07:47 AM]

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