पिता की रिटायरमेंट पर

Chashmebaddoor ठहर जाने के लिए आपकी ज़िन्दगी में,मैं, पड़ाव आ ही गया.गुज़रा वक्त नहीं जो आ न सकूँ परमैं, बदलाव आ ही गया.गवाह हूँ मैं आपकी मेहनत कासंघर्ष का, पर भरे कंधों मेंमैं, झुकाव आ ही गया.अभी नहीं हुए हैं आप ज़िम्मेदारियों से निवृत परदेखा न,मैं, सुझाव आ ही गया.हम... [पूरी पोस्ट]
writer अपराजिता
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[01 Aug 2009 22:23 PM]

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