समालोचना !!!

संवेदना संसार सम्पूर्ण श्रृष्टि में चर चराचर, प्रत्येक उद्यम सुख और आनंद प्राप्ति के निमित्त ही तो करते हैं. परन्तु समस्या यह है कि सुख आनंद विभिन्न श्रोतों द्वारा जितना अधिक हम लेने / जोड़ने में तत्पर रहा करते हैं, उतना किसी को देने में नहीं. जबकि यदि हम सचमुच ही... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना

संवेदनाएं

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[09 Sep 2009 03:28 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix