सिंदूरदान (एक पौराणिक आख्यान) भाग-1

संवेदना संसार वैदिक युग के भी पूर्व सतयुग के आरंभिक काल की कथा है.उन दिनों माता जान्हवी धरा पर अवतरित न हुई थीं..सिन्धु तथा सरस्वती नदी के संगमस्थल पर दैवज्ञ आचार्य महर्षि खालित का गुरुकुल अवस्थित था. महर्षि की बाल विधवा भगिनी गांधारी आश्रम की संचालिका थी.महर्षि के... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना

कथा

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[22 Sep 2009 14:55 PM]

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