और जब तूने पलट कर आवाज़ दी ...

अमृता प्रीतम की याद में..... एक असीम खमोशी थीजो सूखे पत्तों की तरह झरतीया यूँ ही किनारे की रेत की तरह घुलती ...पिछली पोस्ट में अमृता की कहानी का ज़िक्र था .उनकी कहानियाँ ज़िन्दगी के यथार्थ से बुनी हैं इस लिए दिल को छू जाती है और अपनी सी लगती हैं ...उनकी आज की कहानी पिघलती चट्टान... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]

अमृता की कहानियाँ .

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[17 Aug 2009 02:24 AM]

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