और वही मैं हूँ --और वही महक है ...अमृता के जन्मदिन पर
हर कोई कह रहा हैकि वह नही रही मैं कहता हूँवह है कोई सबूत?मैं हूँ अगर वह न होतीतो मैं भी न होता ....इमरोज़...इमरोज़ के इन्ही लफ्जों का सच ही सबसे बड़ा सच है .,अमृता तो यही है .कहाँ वह दूर हो पायी है वो हमसे ...आज के दिन उनको याद करते हैं उन्ही के रूमानी...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[31 Aug 2009 01:16 AM]



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