मोबाइल चुर गया

मन उसका लॉज दो विरोधी खेमों में बंट गया था। उनमें से एक का नेता वो खुद था। कुछ ही दिनों पहले सार्वजनिक फोन के लिए चंदे को लेकर नोंक-झोंक हो गई थी, मार-पीट की नौबत आ गई थी। वो तो भला हो मकान मालिक का जो ऐन वक्त पर आ गया था और मामला ठंडा पड़ गया।उसका मकान... [पूरी पोस्ट]
writer मिथिलेश श्रीवास्तव

कहानी

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[25 Jul 2009 05:34 AM]

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