छोटी होती कविताएं
१जाओ !जा के कह दोउन खामोश बेताबियों से,तूफान के सही वक्त काइंतजार करें !२एक काली धुंधछा रही है आंखों के पास,सब कुछ दिख रहा हैसाफ-साफ, सच-सच,चश्मा पहन लो झूठ-फरेब कावरना आंख-हमेशाधुंधले को ही सच मानने लगेगी।३जलती हुई तीली कोमाचिस के पास न आने दो,जलाकर खाक...
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मिथिलेश श्रीवास्तव
कविता
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[26 Jul 2009 09:08 AM]



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