लव आजकल !
कल का लवआज कल चिंदी-चिंदी होकरबिखर गया हैकमबख्त इश्क की तरह,अब सारे कमीनेफ्लर्ट कर-करकेलाइफ पार्टनर कोडिच करने में जुट गए हैं,किसी अज्ञात का डरसता रहा है उन्हेंलेकिन फिर भीसब के सब किनारे खड़े होकरतलाश रहे हैं अपना-अपना लकचिल्लाते हुएतमराज किलविस की...
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मिथिलेश श्रीवास्तव
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[04 Aug 2009 05:57 AM]



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