अश्क में भी हंसी है

मीडिया स्कूल खुशामदीद पीएम की बेटी ने किताब लिखी है। वो जो पिछली गली में रहती है उसने खोल ली है अब सूट सिलने की दुकान और वो जो रोज बस में मिलती है उसने जेएनयू में एमफिल में पा लिया है एडमिशन। पिता हलवाई हैं और उनकी आंखों में अब खिल आई है चमक। बेटियां गढ़ती ही हैं।... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ वर्तिका नन्दा
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[18 Sep 2009 09:11 AM]

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