नए युग का नूतन मुहावरा : राष्ट्रपति से पंगा, बंदरों को पड़ा महंगा
‘बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद’ जैसे सदियों से चले आ रहे मुहावरे सुनते-सुनते जो लोग बोर हो गए होंगे, वे अब एक नए मुहावरे का लुत्फ उठा सकते हैं : ‘राष्ट्रपति से पंगा, बदरों को पड़ा महंगा।‘ आधुनिक युग के इस नूतन मुहावरे के साथ एक प्लस प्वाइंट यह है कि...
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Ashok Pandey
मुहावरा
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[01 Sep 2009 20:46 PM]



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