मीर, मैं तुम्हारे सिरहाने बोल रहा हूं
उन तमाम बच्चों के लिए, जो अमरीकी आर्थिक प्रतिबंध के कारण मारे गए) तुम्हारे दु:खों को मैं जानता हूंतुम्हारे आंसू मेरे चेहरे को भींगो रहे हैंमैं जानता हूंतुम अभी-अभी रोते-रोते सोये होफिर भीमैं तुम्हारे सिरहाने बैठ कर बोल रहा हूं, मीर!बहुत उदास है रात,पसरा...
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Bijen Salam
कविता
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[03 Aug 2009 03:01 AM]



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