मैं तेरा, तेरी दुनिया का

सरपंच अंगडाई लेते मेरे मैले ख्वाबों को तूने छू लिया था हौले से...जैसे पहले चुंबन सा स्पर्श था वो...और मैं जी लिया था ज़िंदगी मेरी...ख्वाबों में हकीकत की दुनिया...वो मोतियों की दुनिया थी...आंखों से झरती थी...और गर्म पानी का फव्वारा बुझाता था उस शहर की प्यासमैं... [पूरी पोस्ट]
writer देवेश वशिष्ठ ' खबरी '

खबरी

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[01 Sep 2009 08:26 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix