लगता है अब हमें भी टिप्पणी मॉडरेशन चालू कर ही लेना चाहिये
इससे पहले कि पूरी बात का खुलासा हो, "अपने" चंद अश़आर पेश करने की अनुमति चाहूंगा. चुपके चुपके से रात और दिन टसुओं का बहाना याद हैगाहमको तो अभी तक आशिकी का वो जमाना याद हैगा.हमें पता है कि आपका दिल वाह-वाह करने को मचल उठा होगा. पर दाद देने की जल्दी मत...
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Ghost Buster
कविता
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[09 Sep 2009 23:55 PM]



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